उत्तर प्रदेश

Temple Update: राम मंदिर में VIP दर्शन पास क्यों अटके, दान विवाद का असर?

अयोध्या राम मंदिर में दान से जुड़े विवाद और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए प्रशासनिक बदलावों का असर अब श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। हालात ऐसे हैं कि जहां प्रतिदिन करीब 1500 वीआईपी और सुगम दर्शन पास जारी किए जा सकते हैं, वहीं फिलहाल 150 पास भी जारी नहीं हो पा रहे हैं। आखिर इसके पीछे वजह क्या है? आइए समझते हैं।

राम मंदिर में दान से जुड़े विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट के भीतर कई प्रशासनिक बदलाव किए गए। चंपत राय के पद छोड़ने के बाद कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया और दान की गिनती व निगरानी की प्रक्रिया भी पहले से अधिक सख्त कर दी गई। हालांकि इन बदलावों का असर दर्शन पास व्यवस्था पर भी पड़ा, जिससे कई व्यवस्थाएं अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी हैं।

1500 पास की क्षमता, लेकिन 150 भी क्यों नहीं बन पा रहे?

मंदिर प्रशासन के अनुसार, प्रतिदिन बड़ी संख्या में वीआईपी और सुगम दर्शन पास जारी किए जा सकते हैं। लेकिन फिलहाल पास जारी करने की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। इसके कारण कई श्रद्धालुओं और विशिष्ट आगंतुकों को तीर्थ यात्री सेवा केंद्र और ट्रस्ट कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जो पहले रेफरेंस के जरिए पास बनवाते थे।

असल पेच कहां फंसा है?

जानकारी के मुताबिक, पहले वीआईपी और विशिष्ट दर्शन पास मुख्य रूप से तत्कालीन पदाधिकारियों चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के रेफरेंस पर जारी होते थे। इनसे जुड़ी टीम आवेदन प्रक्रिया संभालती थी। लेकिन तीनों की आईडी बंद होने के बाद उनके रेफरेंस से पास जारी होने बंद हो गए। अभी तक नए पदाधिकारियों की अधिकृत आईडी सॉफ्टवेयर में सक्रिय नहीं की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

किन श्रद्धालुओं को अब भी मिल रही है सुविधा?

65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और उनके एक सहयोगी के लिए तत्काल काउंटर पर पास बनाने की सुविधा पहले की तरह जारी है। इसी तरह गोद में शिशु होने की स्थिति में माता-पिता के लिए भी तत्काल पास बनाया जा रहा है। इसके अलावा सामान्य और सुगम दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था भी चालू है, जहां निर्धारित नियमों के अनुसार पहले से आवेदन करना पड़ता है।

ऑनलाइन पास के क्या हैं नियम?

सुगम दर्शन पास दर्शन की तारीख से 15 दिन पहले ऑनलाइन उपलब्ध होता है। आवेदन करने वाले को अपनी फोटो और सभी श्रद्धालुओं की पहचान संबंधी जानकारी देनी होती है। एक आईडी पर वीआईपी या विशिष्ट दर्शन के लिए अधिकतम आठ लोगों का पास बनाया जा सकता है, जबकि सामान्य दर्शन के लिए यह संख्या छह तक सीमित है। एक बार पास जारी होने के बाद अगले 72 घंटे तक उसी आईडी से सामान्य दर्शन पास दोबारा नहीं बन सकता।

नए महासचिव भी क्यों नहीं कर पा रहे समाधान?

सूत्रों के अनुसार, नए अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन सहित अन्य ट्रस्टियों के नाम से कुछ पास जारी किए जा रहे हैं, लेकिन अभी उनके लिए अलग अधिकृत डिजिटल आईडी तैयार नहीं हुई है। जब तक नया प्रशासनिक आदेश जारी नहीं होता और सॉफ्टवेयर में नई आईडी सक्रिय नहीं होती, तब तक वीआईपी पास की व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होना मुश्किल माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं की बढ़ी परेशानी, कब सामान्य होगी व्यवस्था?

फिलहाल राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन वीआईपी और रेफरेंस आधारित पास जारी होने में स्पष्ट रूप से कमी आई है। ट्रस्ट का कहना है कि नए प्रशासनिक आदेश जारी होने और डिजिटल व्यवस्था अपडेट होने के बाद पास जारी करने की प्रक्रिया फिर से सामान्य हो सकती है। तब तक श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रक्रिया और उपलब्ध श्रेणियों के अनुसार ही दर्शन की योजना बनानी होगी।

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